|| आजा बन्दे शरण राम की फिर पाछे पछतावेगा ||
∆बालू कीभीत पवन का खम्भा कब लग खैर मनावेगा|
आ जम तेरे घट ने घेरे तू राम कहन न पावेगा ||
∆ काल बली तेरे सिर पे बैठा भूजा पकड़ ले जावेगा |
मात पिता तेरा कुटूँब कबीला सारा ही खड़ा लखावेगा||
∆ धरम राय तेरा लेखा लेगा वहाँ क्या बात बनावेगा |
लाल खम्भ से बाँधा जावे बिन सतगुरू कौन छूटावेगा||
∆ दिया लिया तेरे संग चलेगा धरा ढँका रह जावेगा |
कहे कबीर सुनो भई साधो करनी के फल पावेगा ||
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