कलयुग में परमात्मा जब भी पृथ्वीलोक पर अवतरित हुये परमात्मा ने अपना नाम कविर्देव यानि कविः ही बताया है।
कहा भी है कवि नाम वेदन में गावा कबीरन् कुरान कह समझावा ।
हम लोग प्रत्येक शब्द का उच्चारण गलत कर लेते हैं।
गांवो मे यह बुराई अब तक व्यापक है।
लालाराम को लल्लू या कालीदास को कलुआ आदि आदि।
कविर् देव को हम कविर कबिर कबीर कबीरन् कबिरू किबरू कुबरू कबीरा खबीरा न जाने कितने अपभ्रंश नामो से बुलाते हैं फिर बाद में सर्व सम्मति से कोई ग्रुप कबीर साहब तो कोई कोई कबीर दास नाम से मशहूर कर देता है।
ज्यादा जानने के इच्छुक पढ़े ज्ञान गंगा।
सत् साहेब जी
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