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Wednesday, 12 November 2014

अवश्य जाने " आ चुका जगततारनहार" कबीर सागर( बोध सागर -स्वसमवेद)पृष्ठ 171 से ।

अवश्य जाने
" आ चुका जगततारनहार"
कबीर सागर( बोध सागर -स्वसमवेद)पृष्ठ 171 से ।
दोहा-पाँच सह्रस अरु पाँचसो,
जब कलियुग बित जाय ।
महापुरुष फरमान तब ,
जग तारन को आय ।।
हिन्दु तुर्क आदिक सबै ,
जेते जीव जहान ।
सतनाम की साख गहि ,
पावैँ पद निर्बान ।।
यथा सरितगण आप ही ,
मिलैँ सिँन्धु मेँ धाय ।
सत सुकृत के मध्ये तिमि,
सबही पंथ समाय ।।
जबलगि पूरण होय नहिँ ,
ठीके को तिथि वार ।
कपट चातुरी तबहिलोँ ,
स्वसमवेद निरधार ।।
सबहिँ नारि नर शुध्द्र तब ,
जब ठीक का दिन अंत ।
कपट चातुरी छोड़ि के ,
शरण कबीर गंहत ।।
एक अनेक से हो गये ,
पुनि अनेक हो एक ।
हंस (जीव आत्मा) चलै सतलोक सब ,
सत्यनाम की की टेक ।।
घर घर बोध विचार हो ,
दुर्मति दुर बहाय ।
कलियुगमेँ एक हो सोई(सब),
बरते सहज सुभाय ।।
कहा उग्र छुद्र हो ,
हर सबकी भवभीर ।
सो समान समदृष्टि हो,
समरथ सत कबीर ।।
विषेश विचार -सन 2000 मेँ ईसा जी के जन्म
को 2000 वर्ष बीत गए ।इससे 508 वर्ष पुर्व
आध शंकराचार्य जी का जन्म हुआ ।
इन्की पुस्तक "हिमालय तीर्थ" के
अनुसार कलयुग 3000 वर्ष बीत जाने पर आध
शँकराचार्य जी का जन्म हुआ ।इस प्रकार सन
2000 को कलयुग (3000+2000+508)5508 वर्ष कलयुग
बीत चुका है।
सन 2000 कलयुग 5508 वर्ष बीत चुका है और
सन1997 मेँ कलयुग 5505 वर्ष बीत चुका है ।
जब कलयुग का समय 5500 वर्ष बीत जाऐगा उस
समय महापुरुष विश्व उध्दार के लिऐ प्रकट होगा ।
वो सतनाम(दो अक्षर का मँत्र) को प्रदान करेगा उसके ज्ञान से
परेरित होकर सभी धर्मो के अनुयायी एक
होगे । सतनाम का जाप कर मोक्ष प्राप्त करेँगे । बुक प्राप्त
PDF फाईल डाउनलोड करे "ज्ञान गंगा "

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