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Friday, 23 January 2015

Kabir ji life story

गरीब, सकल कुरान कबीर है,
हरफ लिखे जो लेख |
काशी के काजी कहै,
गई दीन की टेक ||

गरीब, शिव उतरे शिव पुरी से,
अविगत बदन विनोद |
महके बदन ख़ुशी भये,
लिया ईश कुं गोद ||
गरीब, नजर नजर मिल गयी,
किया ईश प्रणाम |
धन मोमन धन पूर्णा,
धन कांशी निहकाम ||
गरीब, सात बार चर्चा करी,
बोले बालक बैन |
शिव को कर मस्तक धरा,
ला मोमन एक धेन ||
गरीब, अन ब्यावर को दुहत है,
दूध दिया तत्काल |
पीवे बालक ब्रह्म गति,
तहां शिव भये दयाल ||

Meaning:-
Parmatma kabir g 25 din ke ho gaye kuch ahaar nhi kiya,lekin parmatma ka sareer aisa tha ki jaise bacha 1ltr doodh roj peeta ho.Tab neema ko chinta ho gae ki ye bacha marega aur saath m,m marungi iske. Iske bina m nhi reh sakti.

Tab neema ki chinta dekhkar kar parmatma kabir g ne shiv g ko prerna ki. Kyunki neeru nima shiv g ke pujari the aur unhe jabardasti musalmaan bna diya tha,vo shiv g ko bhool nhi paye the,unhi se prathna kar rhi thi. Tab shiv g ek sadhu ka roop bnakar aaye aur neema bahar baith kar ro rahi thi,usse karan pucha.
usne saari baat btae.
shiv g ne kaha dikha bache ko.
neema lae aur shiv g ke charno m daalna chaha.
parmatma hawa m ud gaye aur shiv g ke sar ki sidhae m a gaye aur ruk gaye.
shiv g ne godi m lene ke liye haath badaye ,parmatma unki godi m a gaye.

neema soch rahi thi,baba m badi karamaat h.

shiv g ne parmatma ko pranaam kiya.
vo pehchane nhi,lekin itna abhaas ho gaya ki ye koe param shakti h.

kabir g aur shiv g ki 7 baar charcha hue,parmatma ne kaha ki aap inhe kaho ki ek कवारी gau laye,aap uspar haath rakh dena,vo doodh degi,vo doodh peunga.

shiv g ne neeru nima se kaha.
gau lae gae,shiv g ne gau par haath rakha.
gau ke थन lambe lambe ho gaye,aur doodh ki dhaar chal padi.

shiv g chale gaye.
roj parmatma doodh peeney lage.
गरीब, चौरासी बंधन कटे,
कीनी कलप कबीर |
गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे,
मेटन तीनों ताप |
मोमन के डेरा लिया,
कहै कबीर बाप ||
गरीब, दुनिया कहै यो देव है,
देव कहत हैं ईश |
ईश कहै परब्रह्म है,
पूरण बीसवे बीस ||
गरीब, काजी गए कुरान ले,
धरि लरके का नाम |
अक्षर अक्षर में फुरया,
धन कबीर बलि जांव ||
भवन चतुर्दश लोक सब,
टूटे जम जंजीर ||
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्माण्ड में,
बंदी छोड़ कहाये |
सो तो एक कबीर हैं,
जननी जन्या न माये ||
गरीब, शब्द स्वरुप साहिब धनि,
शब्द सिंध सबमांहि |
बाहर भीतर रमि रहा,
जहाँ तहां सब ठाहि ||
गरीब, जल थल पृथ्वी गगन में,
बाहर भीतर एक |
पूर्ण ब्रह्म कबीर हैं,
अविगत पुरुष अलेख ||
गरीब, सेवक होय कर उतरे,
इस पृथ्वी के माहि |
जीव उधारण जगतगुरु,
बार बार बलि जाहि ||
गरीब, काशीपुरी कस्त किया,
उतरे अधर उधार |
मोमन कूं मुजरा हुआ,
जंगल में दीदार ||
गरीब, कोटि किरण शशि भान सुधि, आसन अधरविमान |
परसत पूर्णब्रह्म कूं,
शीतल पिंड और प्राण ||

‘‘शिशु रूप में प्रकट पूर्ण प्रभु कुँवारी गायों का दूध पीता है‘‘

जिस समय सन् 1398 में पूर्ण ब्रह्म (सतपुरुष) कविर्देव काशी में आए थे उस समय उनका जन्म किसी माता के गर्भ से नहीं हुआ था, क्योंकि वे सर्व के सृजनहार हैं।

बन्दी छोड़ कबीर प्रभु काशी शहर में लहर तारा नामक सरोवर में कमल के फूल पर एक नवजात शिशु का रूप धारण करके विराजमान हुए थे। जिसे नीरु नामक जुलाहा घर ले गया था, लीला करता हुआ बड़ा होकर कबीर प्रभु अपनी महिमा आप ही अपनी अमृतवाणी कविर्वाणी(कबीर वाणी) द्वारा उच्चारण करके सत्यज्ञान वर्णन किया जो आज सर्व शास्त्रों से मेल खा रही हैं।

ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9

अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।
अभी इमम्-अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम् सोमम् इन्द्राय पातवे।

अनुवाद - (उत) विशेष कर (इमम्) इस (शिशुम्) बालक रूप में प्रकट (सोमम्) पूर्ण परमात्मा अमर प्रभु की (इन्द्राय) सुखदायक सुविधा के लिए जो आवश्यक पदार्थ शरीर की (पातवे) वृद्धि के लिए चाहिए वह पूर्ति (अभी) पूर्ण तरह (अध्न्या) जो गाय, सांड द्वारा कभी भी परेशान न की गई हो अर्थात् कुँवारी (धेनवः) गायांे द्वारा (श्रीणन्ति) परवरिश करके की जाती है।

भावार्थ - पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है सुख सुविधा के लिए जो आवश्यक पदार्थ शरीर वृद्धि के लिए चाहिए वह पूर्ति कंुवारी गायों द्वारा की जाती है अर्थात् उस समय कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।


Posted via Blogaway

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