Laxmikanta Chawlaपुरी के शंकराचार्य का बयान निंदनीय, सामाजिक एकता को खंडित करने वालापुरी के शंकराचार्य जी ने दलित समाज को मंदिरों में प्रवेश न देने के पुरानी गैरकानूनी और गैरइंसानी व्यवस्था को सही ठहराने का जो वक्तव्य दिया है वह एकदम गलत है। इसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। शंकराचार्यजी को याद रखना होगा कि हिंदू धर्म में यह संदेश दिया गया है कि संसार के हर जीव में, जड़ में, चेतन में वह ईश्वर बसता है और जो उस ईश्वर के दर्शन करता है वही सच्चा हिंदू है, अच्छा इंसान है।शंकराचार्य जी को यह भी याद रखना चाहिए कि जाति और धर्म के आधार पर समाजको बांटने से जितना हमारे समाज का अतीत में नुकसान हुआ है उसे याद रखते हुए कभी भी मनुष्य-मनुष्य को बांटने की बात नहीं करनी चाहिए।शंकराचार्य जी को यह भी याद रखना चाहिए कि भारत का संविधान भारत के हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है। अच्छा हो, शंकराचार्य जी अपना वक्तव्य वापस लें और पूरे देश में अगर कहीं ऐसी बुराई है जहां जाति-पातिके आधार पर भेद किया जाता है तो स्वयं उन्हें आगे जाकर इस बुराई को मिटाने के लिए नेतृत्व करना चाहिए। शंकराचार्य जी यह याद रखें कि भगवान श्रीकृष्ण जी ने भी गीता में यह सीधा-सीधा संदेश दिया है कि सभी जीवों को, सभी वर्णों को कर्म के आधार पर भगवान ने बनाया है। कोई छोटा बड़ा नहीं।लक्ष्मीकांता चावला
Sunday, 19 October 2014
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