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Saturday, 25 October 2014

गहने कपडे तन की शोभा, तन ये कचचो भानडो!...भगती बिना कुतिया बनोगी, राम भजो ना रानडो.!!

"गहने कपडे तन की शोभा, तन ये कचचो भानडो!...भगती बिना कुतिया बनोगी, राम भजो ना रानडो.!!"एक बार एक राजा किसी साधवी के सतंसग मे जाने लगा.! उसका नाम था पुललो.राजा कीरानीयो को पता चला तो सोचने लगी कि वो पुललो कया हम से भी जयदा सुनदर है ! जोराजा उसके पास जाता है..रानीयो ने ..राजा से कहा की आप अपने राजमहल मे पुललो से एक सतसंग करवाईये..राजा ने सोचा चलो इन रानीयो को भी कुछ भगवान का गयान सुनने को मिल जायेगा...तो अगले दिन पुललो आती है जैसे मैले से कपडे हाथ मे इकतारा लिये हुए ..एेसे लग रहा था कई दिन से नहाई भी ना हो..हरी का भजन करती आती है....दुसरी तरफ से रानीयां पुललो को नीचा दिखाने के लिए हार सिगांर करे बहुत सुनदर बनकर आती है...जब रानीयां पुललो को देखती है तो बहुत हंसती है जोरजोर से ..आैर बोलती है ये है वो पुललो ये है वो पुललो...आैर अपनी सुनदरता दिखाने लगती है...अब पुललो कहती है रानीयो से...जरा गौर से सुनो.."गहने कपडे तन की शोभा, तन ये कचचो भानडो!...भगती बिना कुतिया बनोगी, राम भजो ना रानडो.!!"...कबीर जी कि अमृतवाणी ......"एक हरी के नाम बिन नार कुतिया होय !गली गली फिरे टुक ना डाले कोय...!!नकबेशर नक बे बनी पेहरे थी हार हमेल !...सुनदरी से कुतिया बनी सुन साहेब के खेल...!!"जो राजा कि रानी 9 -9 लाख के हार पहनती थी ..वो सुंदरी फिर कुतिया बनकर नंगी गली में घूमती है ....एक उस परमात्मा कि रियल भगती के बिना ..."वो परदे की सुनदरी सुनो सनदेशा मोर !..गात उघाडा फिरती है करे सारेय मे शोर...!!"वो राजा कि रानी जो पर्दो में रहा करती काजू किसमिस कि खीर खाती थी ..वो अब बिना कपड़ो के कुतिया बनकर ..धर्मशाला में शोर मचा रही है ..एक टुकड़े के लिए जो इंसान उस परमात्मा का विधान तोड़ कर मन मर्ज़ी से चलता है ! उसके साथ ऐसा हीहोता है जी"बीबी परदे मे रहा करती थी डयोडी लगे थी बाहर.!..गात उघाडा फिरती है बन कुतिया बाजार...!!"वो राजा कि बीवी रनिया पर्दो में रहा करती थी ..और बहार बॉडीगार्ड खड़े रहते थे ..वो राजा कि रानी एक सुप्रीम गोड कि भगती के बिना अब कुतिया बनकर नंगी बिना कपड़ो के घूम रही है ...कहा गयी वो राजा कि रानी कि इज़ज़त जो ये कहती थी कि हम तो इज़ज़त दार घर कि बहु बेटियाँ हैं ------------सम्पूर्ण भगति मार्ग कि जानकारी के लिए visit - jagatgururampalji.org

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