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Saturday, 25 October 2014

पृथ्वी पर जो भी जीव पग धारे |

साहेब कहते है :-पृथ्वी पर जो भी जीव पग धारे | लाख जीव एक दिन में मारे ||साहेब कहते है, जो भी मानव पृथ्वी पर पग रखता है लाख जीव की हत्या एक दिन में करता है, हमारे वातावरण में शूस्म जीव रहते है जो हमारे स्वांस लेने, चलने, नहाने में मारे जाते है जिनका पाप हमे भोगने होते है और जिसके लिए हमें 84 लाख योनियों में डाला जाता है, ये काल भगवान का विधान है और काल भगवान इन तीन लोक के परधान है जिसका प्रमाण साक्क्षी गीता है जिसमे स्वम गीता ज्ञान दाता कह रहा है अर्जुन ये कर्म भुमी है और हम कर्म जाल में फसे है जिसके अनुसार हमदुःख सुख भोग रहे है अथार्त जैसी करनी वैसी भरणी न चाहते हुए भी हमे 84 योनियों का भयंकर दुःख भोगना पड़ता है और इन कष्टो से बचने का गीता ज्ञान दाताने एक मात्र उपाय बताया है पूर्ण गुरु तत्वदर्शी संत को ढूढ़ कर उस परमपद की खोज करो जहा जाने के बाद जीव इस भवसागर को वापिस नही आते अथार्त कर्म बंधन सेछूट जाते है.इसी का प्रमाण गीता अध्याय 4 के 34 श्लोक में दिया है और और अध्याय 18 के 62 में इसी का प्रमाण हैकबीर साहेब कहते है :चल हंसा सतलोक हमारे, छोडो यह संसारा हो।इस संसार का काल है राजा, करम को जाल पसारा हो।चौदह भवन बसै जाके मुख, सबका करत अहारा हो।।जारि बारि कोयला कर डारत, फिर फिर दे औतारा हो।।ब्रह्मा बिस्नु सिव तन धरि आये, और को कौन बिचारा हो !सुर नर मुनि सब छल बल मारिन, चौरासी में डारा हो।।मद्ध अकास आप जहं बैठे, जोति सबद उजियारा हो।वही पार इक नगर बसतु है, बरसत अमृत धारा हो।कहे कबीर सुनो धर्मदासा, लखो पुरुष दरबारा हो।KAAL :

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