धन्य कबीर कुछ जलवा दिखाना हो तो ऐसा हो |बिना माँ बाप के दुनिया में आना ह तो ऐसा हो |टेक|उतर आसमान के एक नूर का गोला कमदल पर |वो आके बन गया बालक, बहाना हो तो ऐसा हो ||कहूँ क्या गढ गंगा के किनारे शिष्य होने का |जो रामानंद स्वामी को भुलाना हो तो ऐसा हो |छुड़ा कर ढ़ोंग दुनिया का सत्य उपदेश देते थे |सरे मैदान प डंका बजाना हो तो ऐसा हो |बहस को पंडित मोलवी सब पास में आए |भये सर्मिंदे आपी खुद , हराना हो तो ऐसा हो |सुना कर ज्ञान किया दोउ दीन को चेला |अगर संसार में सतगुरु कहाना हो तो ऐसा हो |हजारों बैल भरके धान, केशव भेट तो लाया |रखा नही एक दाना गर, लुटाना हो तो ऐसा हो |किया सत्धर्म का प्रचार पहले पहल कांशी में |बिना भक्ति के मुक्ति का ठिकाना हो तो ऐसा हो |छोडकर फूल और तुलस, गए सहेद निज घर को |परम अवतार इस जग से रवाना हो तो ऐसा हो |बचाए हिंसको के हाथ से, हिंदू धर्म साबित |कहे धर्मदास गहरी जड़ जमाना हो तो ऐसा हो |---
Wednesday, 22 October 2014
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धन्य कबीर कुछ जलवा दिखाना हो तो ऐसा हो
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sabad kabir ji ka
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