कहा सोवे इस मोह माया की रैँन मे बन्दे कहा सपनोँ मे खो गया ।सतगुरु हेला देकर जगा रहेँ भाई अब तो उठ सवेरा हो गया ।।सत्संग जल से मल मल नहा ले, निकाल ले मैल शरीर का ।लोक लाज को छोड़कर बन्दे नाम भज ले कबीर का ।।समय रहते जाग रे बन्दे, पाछे फिर पछताऐगा ।विदा होकर जाएगा संसार से अकेला , जब तु हिचकी भर भर रोयेगा ।।जल्दी ले ले नाम सतगुरु से , तेरा जन्म मरण का रोग मिट जाऐगा ।कहे कबीर तुझे सतलोक ले चलूँ , तु वहाँ आनन्द खूब मनाऐगा ।। सत साहेब ।।जय बंदी छोड़ की ।।
Wednesday, 22 October 2014
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कहा सोवे इस मोह माया की रैँन मे बन्दे कहा सपनोँ मे खो गया ।
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sabad kabir ji ka
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