सत साहेब
☝बंदीछोड सतगुरु संत
रामपालजी महाराज की जय
हो ☝ पुण॔ ब्रह्म परमात्मा
कबीर साहेब की वाणी लिख
कर भेज रहा हुँ
1
धर्मदास मैं सत बताऊँ।
भवसागर को भरम मिटाऊँ।
2
करो भक्ति भव बन्धन काटो।
जनम मरन का संशय फाटो।
3
भाव भक्ति करियो चितलाय।
सेवो साध तजि मान बडाई।
4
धर्मदास सुन साधु पद ऊँचा।
इन सीढ़ी कोई नहिं पहुंचा।।
5
दान देय सोई फल पावे।
भवसागर भुगत को आवे।।
6
तीर्थ नहाये जो कुछ होई।
सो मै भाखि सुनाऊँ तोई।।
7
जनम लेय उज्ज्वल तन पावे
धन्य होय पुनि जग में आवे।
8
इन्द्रिय साधन है तपभारी।
तामस तेज क्रोध अहंकारी।।
9
यह व्रत एक भक्ति का पूरा।
और व्रत सब कीजे दूरा।।
10
और व्रत सब जम की फांसी।
भक्ति व्रत मंह मिले अविनाशी
शंकरदास मालनू
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Tuesday, 3 March 2015
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