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Friday, 20 March 2015

"गहने कपड़ेे तन की शोभा, तन ये कच्चो भानड़ो !... भक्ति बिना कुतिया बनोगी, राम भजो ना रानड़ो .!!"


"गहने कपड़ेे तन की शोभा,
तन ये कच्चो भानड़ो !...
भक्ति बिना कुतिया बनोगी,
राम भजो ना रानड़ो .!!"

" सत् साहेब जी "
"गहने कपड़ेे तन की शोभा,
तन ये कच्चो भानड़ो !...
भक्ति बिना कुतिया बनोगी,
राम भजो ना रानड़ो .!!"
एक बार एक
राजा किसी साध्वी के
सतंसग मे जाने लगा.!
उसका नाम
था पुललो.राजा की रानीयो को पता चला तो सोचने
लगी कि वो पुललो क्या हम
से भी ज्यादा सुंन्दर है !
जो राजा उसके पास
जाता है..रानीयो ने ..राजा से
कहा की आप अपने राजमहल
मे पुललो से एक सतसंग
करवाईये..राजा ने
सोचा चलो इन
रानीयो को भी कुछ
भगवान का ज्ञान सुनने
को मिल जायेगा...तो अगले
दिन पुललो आती है जैसे मैले
से कपड़ेे हाथ मे
इकतारा लिये हुए ..ऐसे लग
रहा था कई दिन से नहाई
भी ना हो..हरी का भजन
करती आती है....दुसरी तरफ
से
रानीयां पुललो को निचा दिखाने
के लिए हार सिगांर करे
बहुत सुंन्दर बनकर
आती है...जब
रानीयां पुललो को देखती है
तो बहुत हंसती है जोर जोर
से ..और बोलती है ये है
वो पुललो ये है
वो पुललो...और
अपनी सुँन्दरता दिखाने
लगती है...
अब पुललो कहती है
रानीयो से...जरा गौर से
सुनो..
"गहने कपड़ेे तन की शोभा,
तन ये कच्चो भानड़ो !...
भक्ति बिना कुतिया बनोगी,
राम भजो ना रानड़ो .!!"...
कबीर साहेब जी - की अमृतवाणी ......
"एक हरी के नाम बिन नार
कुतिया होय !
गली गली भौकत फिरे टुक ना डाले
कोय...!!
नकबेशर नक बे बनी पेहरे
थी हार हमेल !...
सुन्दरी से कुतिया बनी सुन
साहेब के खेल...!!"
जो राजा कि रानी 9 -9
लाख के हार
पहनती थी ..वो सुंदरी फिर
कुतिया बनकर नंगी गली में
घूमती है ....एक उस
परमात्मा कि रियल
भक्ति के बिना ...
"वो पर्दे
की सुन्दरी सुनो सन्देशां मोर !..
गात उगाड़ा फिरती है करे
सारेय मे शोर...!!"
वो राजा कि रानी जो पर्दो में
रहा करती काजू किसमिस
की खीर खाती थी ..वो अब
बिना कपड़ो के
कुतिया बनकर..धर्मशाला में
शोर मचा रही है ..एक टुकड़े
के लिए जो इंसान उस
परमात्मा का विद्धान तोड़
कर मन मर्ज़ी से चलता है !
उसके साथ ऐसा ही होता है
जी
"बीबी परदे मे
रहा करती थी ड्योडी लगे
थी बाहर.!..
गात उगाड़ा फिरती है बन
कुतिया बाजार...!!"
वो राजा कि बीवी रनिया पर्दो में
रहा करती थी ..और बहार
बॉडीगार्ड खड़े रहते
थे ..वो राजा कि रानी एक
सुप्रीम गोड ( परमात्मा ) की भक्ति के
बिना अब कुतिया बनकर
नंगी बिना कपड़ो के घूम
रही है ...कहा गयी वो राजा कि रानी कि इज़्ज़त
जो ये कहती थी कि हम
तो इज़्ज़त दार घर कि बहु
बेटियाँ हैं ------------
सत् साहेब जी सभी को !! —

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