परमपिता परमेँश्वर के द्वारा हम तुच्छ बुध्दि जीवोँ को इक कथा द्वारा हमेँ कैसा अनमोल ज्ञान दिया :-
एक गाँव के पास एक संत जी रहते थे और गाँव मेँ संत जी के बहुत से शिष्य थे और उन भगतोँ द्वारा अपनेँ गुरु देँव के लिऐ आश्रम बना रखा था संत जी कभी कभी वहाँ आते थे और बाकी समय मेँ जगह-जगह जा कर भगतिँ ज्ञान प्रचार करते थे । एक बार संत जी उस आश्रम मेँ आये वहाँ पर उस गाँव के भगतोँ ने गुरु देँव व भगतोँ के खानेँ की सेँवा गुरु देँव जी से ले रखी थी कि जब तक गुरु जी आश्रम मेँ रहते थे तो सभी गाँव वाले भगत अपनी सेँवा के अनुसार अपनी-अपनी बारी के अनुसार गुरु देँव जी व वहाँ रहने वाले भगतोँ के लिऐ खाना अपनेँ घर से बना कर लेकर आते थे ।
एक बार इक बहन की गुरु जी के खानेँ की सेँवा की बारी की आई।
बहन ने खाना बनाया
और खीर बनानेँ के लिऐ दूध देँखा तो दूध खराब था तब बहन अपनी पड़ोसन के पास जाती है पहले उसे हाल चाल पुछती है तो वो पड़ोसन बताती है कि पहले पति मरा उसका दु:ख देखा अब लड़का है जो शराब पीता है कुछ कहती हूँ तो ये झगड़ा करता है तब उस बहन ने अपनी पड़ोसन से कहा कि बहन ये सब दु:ख पाप कर्म वश है और भगतिँ से ही ये दु:ख दुर होगे और अपनी मुक्ति भी और कहा बहन हमारे गुरु जी के पास से भगतिँ लेकर भगतिँ करना आप मेरे साथ चलना फिर पड़ोसन ने कहा की चलेगे कभी और कहा की क्या काम आई हो तब बहन ने कहा की मेरा आज गुरु जी का खाना पहुँचाने की बारी है और खीर बनानी थी पर दूध खराब हो गया है आप दूध उधार देँ दो या पैसे लो तब उस पड़ोसन ने कुछ देर पहले ही दूध निकाला था सारा ही बहन को दे दिया और कहा की बहन लो दूध मुझे भी कुछ पुण्य मिल जाऐँगा फ्री ही ले जाओँ ।बहन ने खाना गुरु जी के पास पहुँचाया ।
बहन अब अपनी पड़ोसन बहन को हर रोज गुरु जी के बताये ज्ञान की चर्चा करती और गुरु जी से नाम लेकर भगतिँ करने को कहती ।ऐसा कुछ महिनेँ चलता रहा और उस पड़ोसन बहन ने भी नाम ले भगतिँ करने लगी और अपनेँ बेटे को भी समझाती की बेटा ये शराब पीना ये गाली गलौच छोँड़ दे और कुछ काम कर।
लड़का हर रोज ऐसे ही नशेँ करता और झगड़ा करता ।
एक दिन उस बहन ने गुरु जी को भी प्रार्थँना की मेरा बेटा अपना जीवन बर्बाद कर रहा हर रोज झगड़ा करता है शराब पीता है कहती हूँ तो मानता नहीँ।
गुरु देँव ने कहा परमात्मा दया करेँगे ।
बहन जब भी गुरु जी के पास जाती तो यही प्रार्थँना करती थी ।
एक दिन उसने सोचा मैँ भी गुरु जी का खाना ज्यादा तो नही एक टाईम का तो पहुँचा ही सकती हुँ ।
फिर बहन ने भगतोँ को भी एक टाईँम के खाना की सेँवा की प्रार्थँना की तब किसी भगत ने अपनी बारी नही दी तब उसी बहन ने उसे अपनी बारी मेँ एक टाईम खाना देने को कहा जिसने उस बहन को गुरु जी से नाम दिलाया था ।
जब उस बहन की बारी आई तब उस पड़ोसन बहन को शाम का खाना गुरु के लिए बनानेँ को कहा तब उसने कहा ठीक है बना देना।
उस पड़ोसन बहन को उस दिन बुखार हो गया था जब तक उसने गुरु जी का खाना बनाया तब तक शाम हो चुकी थी और अधेँरा भी कुछ-कुछ छा गया था और बुखार भी इतनी तेज हो गई थी की चला भी नहीँ जा रहा था तब उसने सोचा की अपनेँ बेटे को बोलूगी कुछ देर बाद लड़का आया तब माता ने कहाँ बेटा आज मेरा एक काम कर दो ये खाना गुरु जी को दे आओँ ।
उसनेँ मना कर दिया तब माँ ने बहुत कहाँ पर ना माना और कहाँ मै ना जाता गुरुओँ के पास तब माँ रोने लगी और कहा आज अगर तूँ ना गया तो गुरु जी के खाने की सेँवा मुझेँ कभी ना मिलेगी बस आज ये काम कर दे आज मै बुखार से चल ना पा रही हूँ और रोने ली ।
फिर लड़के को दया आ गई और कहाँ लाओँ दे खाना दे कर आता हुँ ।
वो लड़का मना इसलिऐ कर रहा था वो गलत संगत के कारण चोरी भी करता था और उस दिन अपने साथियोँ के साथ रात को नगरी के राजा के महल मेँ चोरी का प्लान था और रात को निश्चित स्थान पर सब साथियोँ को इक्कट्ठा होकर चोरी करने जाना था ।
तब उसने सोचा था कि जल्दी से गुरु जी का खाना दे कर भाग कर जल्दी आ कर निश्चित स्थान पर पहुँच कर चोरी करेगेँ और बहुत धन आऐगा मेरे पास ।
लड़का आश्रम जाकर खाना देता है और कहता है कि जल्दी खाओँ और बर्तँन दो मुझेँ जाना है जल्दी तब गुरु जी ने भगतिँ के बारे बताया तो कहता है ये ज्ञान अपने पास रखो जल्दी खाना खाओँ जल्दी जाना है मुझेँ।गुरु जी और भगतोँ ने खाना खाया और बर्तन लेकर लड़का तेजी से दौड़कर आ रहा था क्योकि वो लेट हो गया था कि मैँ जल्दी ना पहुँचा तो चोरी से वँचित रह जाऊँगा और साथी चोरी करने चले जाऐँगे और तेज दौड़कर आ रहा था कि एक काँटा पैर मे चूभ गया और गहरा जा कर टुट गया और अब आराम से चला आ रहा था और चोरी करने ना जा पाया और घर आया आते ही बर्तन फैक दिये माँ ने कहा क्या हुआ बेटा ?
बोला आज ही गया तेरे गुरु के पास काँटा लग गया आज के बाद कभी ना जाऊ और ना तुमे जाने दूँगा।माँ ने उसका पैर देँखा तो
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