कबीर मेरे भगत को दुख ना दीजो कोई,
भगत दुखाय मैं दुखी मेरा आपा भी दुखी होए।
गरीब दास जी महाराज कहते है...'गरीबदास दुख के धडह'
परमात्मा दुखी और असहाय व्यक्तियो के साथ होता है।
निर्दोष संतो और भक्तो को सताकर न तो आज तक कोई सुखी हुआ है न ही कोई होगा... एक नेक राजा का कर्तव्य होता है दोनो पक्षों की बात सुनकर उचित न्यायपूर्ण निर्णय करना, लेकिन आज के कलयुगी राजा सिर्फ अपने स्वार्थवश, अहंकार व अपने हितैषीयो के कहने पर अन्नाय व अत्याचार करने पर उतारू हो जाते है और आज यही बात हरियाणा के पिछले व वर्तमान मुख्यमंत्री ने फिर से दोहरा दी। भक्तो की सिर्फ & सिर्फ एक छोटी सी मांग थी कि सभी केसों की निष्पक्षता से साथ सीबीआई जांच करवाई जाए ताकि सच्चाई दुनिया के सामने आ सके लेकिन यह मांग भी सिरे से ठुकरा दी गयी और एक अन्नायी जज के सविंधान विरोधी आदेश को मानने के लिए निर्दोष भक्तो पर उन्हीं के धर में धुसकर निर्दयतापूर्ण हमला किया गया जिसमें छह भक्तो की मौत हुई और सैकडों की संख्या में भगत धायल हुए। जिस दिन सतलोक आश्रम पर हमला हुआ उस दिन कई हजारों की संख्या में भगत भाई बहन दिल्ली जंतर मंतर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट ने हमारी सुनी और न ही राष्ट्रपति ने...
अब किसी से न्याय की उम्मीद नहीं बची...शायद इन न्यायाधिकारियों को यह नहीं मालूम होगा कि आप सब के ऊपर भी एक अदली न्यायकारी पूर्ण परमात्मा है जो सबसे बड़ा न्यायकारी है, जिसके आगे धर्मराज भी कुर्सी छोड़ कर करबद्ध खडा हो जाता है, उस अदली न्यायकारी परमेश्वर का तराजू एररलेस है, सभी के पल पल का हिसाब उसके पास है।अब सिर्फ पूर्ण परमेश्वर ही न्याय करेंगे।
जिस दिन परमेश्वर के न्याय का समय आयेगा...जिस दिन परमात्मा के न्याय की लाठी उठेगी, उस दिन षड्यंत्रकारियों के लिए धरती भी छोटी पड़ जायेगी।उस दिन उन भगवान विरोधियों को परमात्मा की शक्ति का अहसास होगा। परमात्मा के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं है भाईयो।
यह इस देश का सौभाग्य है कि परमेश्वर की दया इस देश पर हुई। वर्तमान में कबीर परमेश्वर स्वयं संत रुप में यहाँ अवतरित हुए है लेकिन साथ में इस देश का दुर्भाग्य भी है कि ऐसे परम सन्त को न पहचानकर उनका उपहास किया गया और उन्हें जेल में डाल दिया गया। जिस परम सन्त (शायरण) के बारे में भविष्यवाणी करते करते नास्त्रेदमस की भी आंख में आंसू आ गये थे। फ्लोरेंस भी उस महान सन्त के बारे में कहती कहती नहीं थकी, ऐसे सन्त जिन्होंने अमर ज्ञान दिया और लाखो भक्तो के जीवन को सुखमय बना दिया। ऐसे परम सन्त को सिंहासन पर बैठाकर पूजा करने के बजाय जेल में डाल दिया गया।
क्या यह इस देश का दुर्भाग्य नहीं है कि साधु संतो की पवित्र भूमि पर ही संतों और भक्तो के साथ अत्याचार किया गया।
10 साल से झूठे केस झेलने का दुख वही जान सकता है जो इस दुख से परिचित है। भक्त परमात्मा के ज्ञान पर आधारित होते है कि..
जो तोको कांटा बोवे, वाको बो तू फूल,
तोहि फूल के फूल है और वाको है त्रिशूल।
भगत किसी का बुरा नहीं करते और न ही किसी को बददुआ देते है, वह तो सिर्फ परमात्मा के सामने रोते है, परमात्मा ही इनको इनके पापकर्मो की सजा देता है।
राम नही मारे काही को, पापी नहीं है राम,
आपहि मर जावेंगे, कर-कर खोटे काम।
यह अपने पापकर्मो के बोझ से स्वयं ही डूब जायेंगे।
अब यह फायनल टाइम चल रहा है। अब परमात्मा के न्याय का समय आ चुका है। युग परिवर्तन (सतयुग) की शुरुआत हो चुकी है।
सत् साहिब।
जय बन्दी छोड की।
Posted via Blogaway
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