द्रोपद सुता कुं दीन्हें लीर, जाके अनंत बढ़ाये चीर ।
संखों चीर पिताम्बर झीनें, द्रोपदी कारण साहेब कीन्हें |
संखों चीर पिताम्बर डारे, दुशासन से योद्धा हारे |
द्रुपद सुता कैं चीर बढ़ाये, संख असंखों पार ना पाए ।
एक लीर के बदले, मेरे बढ़ गए चीर अपार ।
जो मुझे पहले पता होता, तो सब कुछ देती वार ।।
इसलिए तो सतगुरुदेव जी कह रहे हैं कि पत रखने वाले पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की शरण में आ जाओ नहीं तो काल यहाँ पर जीव आत्माओं की ऐसे ही दुरगति करेगा ...
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