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Monday, 20 October 2014

Story as life

पर्स में फोटोयात्रियों से खचाखच भरी ट्रेन मेंटी.टी.ई. को एक पुराना फटा सा पर्समिला। उसने पर्स को खोलकर यहपता लगाने की कोशिश की कि वहकिसका है। लेकिन पर्स में ऐसा कुछनहीं था जिससे कोई सुराग मिल सके। पर्समें कुछ पैसे और भगवान श्रीकृष्णकी फोटो थी। फिर उस टी.टी.ई. ने हवा मेंपर्स हिलाते हुए पूछा -"यह किसका पर्सहै?"एक बूढ़ा यात्री बोला -"यह मेरा पर्स है।इसे कृपया मुझे दे दें।"टी.टी.ई. नेकहा -"तुम्हें यह साबितकरना होगा कि यह पर्स तुम्हारा ही है।केवल तभी मैं यह पर्स तुम्हेंलौटा सकता हूं।"उस बूढ़े व्यक्ति नेदंतविहीन मुस्कान के साथ उत्तरदिया -"इसमें भगवान श्रीकृष्णकी फोटो है।"टी.टी.ई. ने कहा -"यह कोईठोस सबूत नहीं है। किसी भी व्यक्ति केपर्स में भगवान श्रीकृष्णकी फोटो हो सकती है। इसमें क्या खासबात है? पर्स मेंतुम्हारी फोटो क्यों नहीं है?"बूढ़ा व्यक्ति ठंडी गहरी सांस भरते हुएबोला -"मैं तुम्हें बताता हूंकि मेरा फोटो इस पर्स में क्यों नहीं है।जब मैं स्कूल में पढ़ रहा था, तब ये पर्स मेरेपिता ने मुझे दिया था। उस समय मुझेजेबखर्च के रूप में कुछ पैसे मिलते थे। मैंने पर्समें अपने माता-पिता की फोटो रखी हुयी थी।जब मैं किशोर अवस्था में पहुंचा, मैंअपनी कद-काठी पर मोहित था। मैंने पर्समें से माता-पिता की फोटो हटाकरअपनी फोटो लगा ली। मैं अपने सुंदर चेहरेऔर काले घने बालों को देखकर खुश हुआकरता था। कुछ साल बादमेरी शादी हो गयी। मेरी पत्नी बहुतसुंदर थी और मैं उससे बहुत प्रेम करता था।मैंने पर्स में से अपनी फोटो हटाकरउसकी लगा ली। मैं घंटों उसके सुंदर चेहरेको निहारा करता।जब मेरी पहली संतान का जन्म हुआ, तब मेरेजीवन का नया अध्याय शुरू हुआ। मैं अपनेबच्चे के साथ खेलने के लिए काम पर कम समयखर्च करने लगा। मैं देर से काम परजाता ओर जल्दी लौट आता। कहने की बातनहीं, अब मेरे पर्स में मेरे बच्चे की फोटो आगयी थी।"बूढ़े व्यक्ति ने डबडबाती आँखों के साथबोलना जारी रखा -"कई वर्ष पहले मेरेमाता-पिता का स्वर्गवास हो गया।पिछले वर्ष मेरी पत्नी भी मेरा साथ छोड़गयी। मेरा इकलौता पुत्र अपने परिवार मेंव्यस्त है। उसके पास मेरी देखभाल का क्तनहीं है। जिसे मैंने अपने जिगर के टुकड़ेकी तरह पाला था, वह अब मुझसे बहुत दूरहो चुका है। अब मैंने भगवान कृष्णकी फोटो पर्स में लगा ली है। अब जाकरमुझे एहसास हुआ है कि श्रीकृष्ण ही मेरेशाश्वत साथी हैं। वे हमेशा मेरे साथ रहेंगे।काश मुझे पहले ही यह एहसासहो गया होता। जैसा प्रेम मैंने अपनेपरिवार से किया, वैसा प्रेम यदि मैंनेईश्वर के साथ किया होता तो आज मैंइतना अकेला नहीं होता।"टी.टी.ई. ने उस बूढ़े व्यक्ति को पर्सलौटा दिया। अगले स्टेशन पर ट्रेन के रुकतेही वह टी.टी.ई. प्लेटफार्म पर बनेबुकस्टाल पर पहुंचा और विक्रेता सेबोला -"क्या तुम्हारे पास भगवानकी कोई फोटो है? मुझे अपने पर्स में रखने केलिए चाहिए।

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