लक्ष्मी पूजन"""कल ढोगिंयो का लक्ष्मी पूजन है और कल धन तेरस था। सावन के अन्धों को सब कुछ हरा दिखता है।सारे साल सुबह से शाम तक व्यापारी, नौकरी खेती इत्यादि काम लक्ष्मी पूजन ही तोहै।लक्ष्मी प्राप्ति के लिये देश विदेश मे धक्के खाना अपने और अपने परिवार के लिये भी समय ना होना लक्ष्मी प्राप्ति के लिये सत्य का त्याग करना, चोरी,हेराफेरी, मिलावट ,भ्रष्टाचार, अपराध ये सब लक्ष्मी पूजन नही तो और क्या है फिर कल दीवाली को ये ढोंग क्यों??इस लक्ष्मी के चक्कर मे इतने पाप एकत्रित कर लेते है कि युगो तक भोगने पडते है।लक्ष्मी के विषय मे हमारी नीयत खराब है हमें ये ही नहीं पता कितनी चाहिए और जिस पर हमारी नीयत खराब होगी तो पाप करना मजबुरी हो जाएगी।पहले कबीर जी के ज्ञान से ये जानो कि ये कितनी चाहिए।साई इतनी दीजो जा मे कुटुम्ब समाय । मै भी भूखा ना रहु अतिथि ना भूखा जाऐ।अब कबीर जी के ज्ञान से ये समझो कि ये आएगी कैसे।माया दासी सन्त की उभय दे आशीष।विलसी लातो छडी सुमर सुमर जगदीश।
Saturday, 25 October 2014
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