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Sunday, 19 October 2014

अमेरिका की भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की महत्वपूर्णभविष्यवाणी। ~~संत रामपाल दास जी महाराज केविषय में की गई भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की सटीकभविष्यवाणी

अमेरिका की भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की महत्वपूर्णभविष्यवाणी। ~~संत रामपाल दास जी महाराज केविषय में की गई भविष्यवक्ता फ्लोरेंस की सटीकभविष्यवाणी :-अमेरिका की विश्व विख्यातभविष्यवक्ता फ्लोरेंस ने अपनी भविष्यवाणीयों मेंकई बार भारत का जिक्र किया है। ‘द फाल ऑफसेंशेसनल कल्चर’ नाम की अपनी पुस्तक में उन्होंनेलिखा है कि सन् 2000 आते-आते प्राकृतिक संतुलनभयावह रूप से बिगड़ेगा। लोगों में आक्रोश की प्रबलभावनाहोगा। दुराचार पराकाष्ठा पर होगा।पश्चिमी देशों के विलासितापूर्ण जीवन जीनेवालों में निराशा, बैचेनी और अशांति होगी।अतृप्त अभिलाषाएं और जोर पकड़ेगी। जिससे उनमेंआपसी कटुता बढ़ेगी। चारों ओर हिंसा औरबर्बरता का वातावरण होगा। ऐसा वातावरणहोगा की चारों ओर हाहाकार मच जाएगा।लेकिन भारत से उठने वाली एक नई विचारधारा इसघातक वातावरण को समाप्त कर देगी। वहविचारधारा वैज्ञानिक दृष्टि से सामंजस्य और भाईचारे का महत्व समझाएगी, वह यहभी समझाएगी कि धर्म और विज्ञान में आपस मेंविरोध नहीं है। आध्यात्मिकता की उच्चता औरभौतिकता का खोखलापन सबके सामने उजागरकरेगी। मध्यमवर्ग उस विचारधारा से बहुत अधिकप्रभावित होगा। यह वर्ग समाज केसभी वर्गों को अच्छे समाज के निर्माण के लिएउत्प्रेरित करेगा। यह विचारधारा पूरे विश्व मेंचमत्कारी परिवर्तन लाएगी।मुझेअपनी छठी अतींद्रिय शक्ति से यह एहसासहो रहा है कि इस विचारधारा को जन्म देनेवाला वह महान संत भारत में जन्म ले चुका है। उस संतके ओजस्वी व्यक्तित्व का प्रभाव सब को चमत्कृतकरेगा। उसकी विचारधारा अध्यात्म के कम होतेजा रहे प्रभाव को फिर से नई स्फूर्ति देगी।चारोंओर आध्यात्मिक वातावरण होगा। संतकी विचारधारा से प्रभावित लोग विश्व केकल्याण के लिए पश्चिम की ओर चलेंगे। धीरे-धीरेएशिया, यूरोप और अमेरिका पर पूरी तरहछा जाएगें। उस संत की विचारधारा से पूरा विश्वप्रभावित होगा और उनके चरण चिन्हों पर चलेगा।पश्चिमी देश के लोग उन्हें ईसा, मुसलमान उन्हें एकसच्चा रहनुमा और एशिया के लोग उन्हें भगवानका अवतार मानेंगे। उस महान संतकी विचारधारा से बौद्धिक क्रांति होगी।बुद्धिजीवियों की मान्यताएं बदलेंगी। उनमें ईश्वर केप्रति श्रद्धा और विश्वास की कोंपले फूटेंगी।फ्लोरेंस के अनुसार वह संत भारत में जन्म ले चुकें हैं। वह इस संतसे काफी प्रभावित थी। अपनीएक दूसरी पुस्तक‘गोल्डन लाइट ऑफ न्यू एरा’ में भी उन्होंने लिखा है।‘‘जब मैं ध्यान लगाती हूँ तो अक्सर एक संतको देखती हूँ। गौर वर्ण का है। सफेद बाल हैं। उसकेमुख पर न दाढ़ी है, न मूछ है। उस संत के ललाट पर गजबका तेज होता है। उनके ललाट पर आकाश से एकनक्षत्र के प्रकाश की किरणें निरंतर बरसती रहती हैं।मैं देखती हूँ कि वह संतअपनी कल्याणकारी विचारधारा तथा अपने सत्चरित्र प्रबल अनुयायियों की शक्ति से सम्पूर्णविश्व में नए ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। वह संतअपनी शक्ति निरंतर बढ़ा रहे हैं। उनमें इतनी शक्ति हैकि वह प्राकृतिक परिवर्तन भी कर सकते हैं।वहअपना कार्य वैज्ञानिक ढंग से करेंगे। उनकी कृपा औरप्रयत्नों से मानवीय सभ्यता में नई जागृति आएगी।विश्व के समस्त जनसमूह में नई चेतना का संचार होगा।लोकशक्ति का एक नया रूप उभर कर सामनेआएगा जो सत्ताधारियों की मनमानियों पर अंकुशलगा देगा।’’मनोचिकित्सक तथा सम्मोहन कला केविश्व प्रसिद्धज्ञाता डॉ. मोरे बर्सटीनकी फ्लोरेंस से अच्छीदोस्ती थी। एक बार फ्लोरेंसने उनसे भी कहा था। ‘‘डॉक्टर वह समय बड़ी तेजी सेनजदीक आ रहा है जब सत्ता लोलुप राजनेताओंकी अपेक्षा आप जैसे समाजसेवकों की बातें समाजअधिक ध्यान से सुनेगा। 21 वीं सदी के आते आते एकनई विचारधारा पूरे विश्व को प्रभावित करेगी। हरराष्ट्र में सच्चरित्र धार्मिक लोगों का संगठनलोगों के दिमाग में बैठी गलत मान्यताओं को बदलदेगा। यह विचारधारा भारत से प्रस्फुटित होंगी।वहीं से पूरे विश्व में फैलेगी। मैं उस पवित्र स्थानपरएक प्रचंड तपस्वी को देख रही हूँ। जिसका तेजबड़ी तेजी से फैल रहा है। मनुष्य में सोए देवत्वको जगाने तथा धरती का स्वर्ग जैसा बनाने के लिएवह संत दिन रात प्रयत्न कर रहे हैं।>> एक पत्रकार ने1964 में फ्लोरेंस से पूछा था कि क्या वहदुनिया का भविष्य बता सकती है। फ्लोरेंस ने इसकेजवाब में कहा था 1970 की शुरूवात व्यापक उथल-पुथलके साथ होगी। 1979-80 के बाद ऐसे-ऐसे भूकंप आऐंगेकी न्यूजर्सी का कुछ हिस्सा तथा यूरोप का औरएशिया के कई देशों के स्थान भूकंप से विदीर्णहो जाएंगे। कुछ जलमग्न भी हो जाऐंगे। तृतीयविश्वयुद्ध का आतंक सबके दिमाग में बैठ जाएगा औरवे इस युद्ध की तैयारी करेंगे, लेकिन भारतीयराजनेता अपने प्रभाव और बुद्धि से तीसरे विश्वयुद्धको टालने में सफल हो जाऐंगे। तीसरे विश्वयुद्ध के शुरूहोने तक भारत के शासन की बागडोर आध्यात्मिकप्रवृत्ति के लोगों के हाथ में होगी, इसलिए उनकेप्रभाव से विश्वयुद्ध टलेगा। वे शासक एक महान संत केओजस्वी तथा क्रांतिकारी विचारधारा सेप्रभावित होंगे। वे उस संत के प्रति उसी तरह समर्पितहोंगे जैसे वाशिंगटन स्वतंत्रता एवं मानवता केप्रति समर्पित थे।’’>> अमेरिका के शहरन्यूजर्सी की रहने वाली फ्लोरेंस सचमुच एक विलक्षणमहिला थी। एक बार नेबेल नाम के व्यक्ति ने टी.वी.कार्यक्रम के दौरान उनसे बोला, ‘‘आप भारत में जन्मले चुके संत के बारे में तो अक्सर बताती रहती हैं। मैंअपने बारे में कुछ जानना चाहता हूँ बताइए।’’फ्लोरेंस नेउसके दाहिने हाथ को थाम लिया और बोली, ‘‘आपबहुत जल्द किसी दूसरे राज्य से प्रसारण करेंगे।’’ नेबेलएक प्रसारण सेवा के कर्मचारी थे। फ्लोरेंस की इसबात पर वह हंसने लगे। कुछ क्षण बाद बोले ‘‘आपने मुझसेयह अच्छा मजाक किया। यदि हमारी कंपनी केअधिकारी इस कार्यक्रम को देख रहे होंगे तो मैं दूसरेराज्य में जाऊ या नहीं, फिलहाल अपनी कंपनी सेतुरंत निकाल दिया जाऊंगा।’’ कुछ ही मिनटों केबाद टी.वी. के कंट्रोल रूम का फोन घनघना उठा।फोन नेबेल के लिए था। उनकी कंपनी के जनरल मैनेजरउनसे बात करना चाहते थे। नेबेल ने जब फोनउठाया तो उन्होंने कहा हमने न्यूयार्क से प्रसारणकरने का काम शुरू करने का निर्णय लिया हैवहां तुम्हें ही भेजा जाएगा। अभी यह बात गुप्तरखना इसकी घोषणा कल की जाएगी। मैं टीवी. परफ्लोरेंस के साथ तुम्हारी बातचीत देख रहा था।फ्लोरेंस ने तुम्हारे विषय में जो बताया है वहपूरी तरह सच है। आश्चर्य है कि उन्हें यह बात कैसेमालूम हो गई ?’’ नेबेल फ्लोरेंस का चेहरा देखता रहगया।>> कुछ पत्रकारों ने उनसे एक बारपूछा था कि वह भविष्य को कैसे देख लेती हैंतथा गायब व्यक्ति या वस्तुओं का पता कैसेलगा लेती हैं, तो फ्लोरेंस ने बताया,‘‘मुझे स्वयंनहीं मालूम कि ऐसा कैसे सम्भव हो जाता है। मैंभविष्य के विषय में एक बहुत महत्वपूर्ण बातबता रहीं हूँ।20 वीं शताब्दी के अंत में भारतवर्ष से एकप्रकाश निकलेगा। यह प्रकाश पूरी दुनिया को उनदैवी शक्तियों के विषय में जानकारी देगा, जो अबतक हम सभी के लिए रहस्यमय बनी हुई हैं।(देवीशक्तियों की जानकारी जो सन्त रामपालदास जी महाराज द्वारा बताई गई हैं। एक दिव्यमहापुरूष द्वारा यह प्रकाश पूरे विश्व में फैलेगा। वहसभी को सत् मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा। समस्तदुनिया में एक नयी सोच की ज्योति फैलेगी। जब मैंध्यानावस्था में होती हूँ तो अक्सर यहदिव्यमहापुरूष मुझे दिखाई देते हैं।’’फ्लोरेंस ने बार-बार इससंत या दिव्य महापुरूष का जिक्र किया है। साथही यह भी बताया है कि उत्तरी भारतवर्ष के एकपवित्र स्थान पर वह मौजूद हैं।

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