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Sunday, 20 December 2015

Dharam dass ji mahraj

एक बणिये ( गुप्‍ता ) ने खोला परमात्‍मा का राज । जिसे परमात्‍मा मिले थे । उन्‍होनें स्‍वयं परमात्‍मा के मुख कमल से ज्ञान समझा परन्‍तु उस बणिये ने पक्‍का विश्‍वास तब किया जब उस‍ जिन्‍दा माहात्‍मा ( कबीर साहेब ) ने उस बणिये को स्‍वर्ग से ऊपर का स्‍थान ‘’ सतलोक ‘’ के जीवित ही दर्शन कराये । बणिया था न जल्दि से किसी पर विश्‍वास नहीं करता । तब उसने सबसे पहले उस अमृत ज्ञान को कबीर सागर नामक पुस्‍तक के रूप में लिपिबद्ध किया जिसे स्‍वसम वेद भी कहा जाता है । और तब उस ज्ञान का प्रचार प्रसार किया और सबको बताया कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्‍मा रूप में धरति पर आये थे । उस बणिये का नाम है सेठ धर्मदास जो मध्‍यप्रदेश के बांदोगढ का रहने वाला था । आज जातिवाद के चलते पूजनीय कबीर साहेब जी को पूर्ण परमात्‍मा मानना तथाकथित उच्‍च जातिवर्ग खास कर ब्राहम्‍ण और गुप्‍ता, अग्रवाल जाति वालों को खटक रहा है । क्‍योंकि कबीर साहेब जी एक नीची जुलाहा जाति में पले बडे हुए थे । परन्‍तु उसी अनमोल ज्ञान को आजतक तथाकथित धर्माचार्यो ने हमसे छुपये रखा । उसी प्रकार गरीबदास जी महाराज , छुडानी जिला झझर, राज्‍य हरियाणा वाले को कबीर साहेब जिन्‍दा महात्‍मा के रूप में मिले और सतलोक दिखाया । बिल्‍कुल वहीं ज्ञान ‘’ ग्रंथ साहेब ‘’ में गरीबदास जी महाराज की अमृत वाणी के रूप में गोपलदास जी महाराज से लिपिबद्ध करवा । वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ने उसी अमृत ज्ञान का वेद शास्‍त्रों से मिलान कर सबके सामने प्रमाणित कर परमात्‍मा और उसकी सतभक्ति का गूढ रहस्‍य खोल दिया है । और सभी संतों महन्‍तों को ज्ञानचर्चा के लिए आमंत्रित किया है कि आओ चर्चा करो मैं गलत हूं तो मैं आपका शिष्‍य बन जाउंगा वर्ना आप मेरे शिष्‍य बन जाना । सभी मूहॅ छिपाये फिर रहें है और तत्‍वज्ञान को न समझ कर षडयन्‍त्र करके शासकों और प्रजा को गुमराह किये हुए हैं । सत्‍य को जानने के लिए और अपना कल्‍याण कराने हेतु पढियें पुस्‍तक ‘’ ज्ञ

ान गंगा ‘’ और प्रतिदिन देखियें साधना चैनल शाम को 7.40 से 8.40 अधिक जानकारी हेतु देखे वेबसाईट www.jagatgururampalji.org

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