********* (फोटो -10) के p2,p3**********
======== तत्वदर्शी सन्त=============
वेद गीता कुरानशरीफ बाईबल गुरुग्रंथ इन सब मे परमात्मा कबीर साहेब को पाकर सतलोक जाने की विधि नही हैा इन सब मे केवल परमात्मा और तत्वदर्शी संत की पहचान बताई हैा. क्योकि वह परमात्मा ही खुद तत्वदर्शी संत की भूमिका करने आते हैा और मोक्ष मंत्र देकर सतलोक भेजते हैा जैसे नानक जी धर्मदास जी को कबीर साहेब ने मंत्र देकर सतलोक भेजा...
गीता अध्याय 4 के 34श्लोक मे गीता ज्ञान दाता कह रहा है उस तत्वज्ञान को तू तत्वदर्शी संतो के पास जाकर समझ वह तत्वदर्शी संत तूझे उस तत्वज्ञान का उपदेश करेगे..
नोट- गीता चारो वेदो का सारांश है इससे स्पष्ट होता हैा वेद गीता मे पूर्ण परमात्मा की भक्त विधि तत्वज्ञान नही हैा वह तो कोई तत्वदर्शी संत बतायेगा..
तो वर्तमान मे तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैा..
कुरान शरीफ- सुरत फुरकान 25 आयत 59 मे कुरान का ज्ञान देने वाला अल्लाह कह रहा जिसने धरती और आसमान के बीच मे सब कुछ छह दिन मे पैदा किया फिर सिहासन पर जा बैठा वह अल्लाह कबीर हैा उसकी खबर किसी बाखबर ( इल्मवाले) से पूछो ...
नोट- इससे स्पष्ट होता है कुरान शरीफ मे बडे अल्लाह कबीर की पूजा विधि नही हैा उसकी जानकारी कोई बाखबर देगा.. कुरान मे नही हैा...
वह बाखबर( इल्मवाले) संत रामपाल जी है वर्तमान मे...
******* तत्वदर्शी बाखबर की पहचान********** ======= (फोटो-9) के p2 मे देखे============
गीता अध्याय 15 के 1,2,3,4 श्लोक मे गीता ज्ञान दाता कह रहा है यह संसार एक के पेड की तरह है जिसकी मूल(जड) तो पूर्णपरमात्मा कही है और तीनो गुण (ब्रह्मा,विष्णु,शिव) शाखाएं कही गई है जो भी ज्ञानी इस संसार रूपी पेड के सभी छंद मतलब भागो को भिन्न भिन्न जड से पत्तो तक बता देगा वह संसार को तत्व से जानने वाला हैा मतलब तत्वदर्शी संत हैा.. उसरे पश्चात जब वह तत्वदर्शी मिल जाये उसके तत्व ज्ञान को समझ कर उस परमेश्वर की खोज करनी चाहिये जहा गये हुए साधक इस संसार मे लौटकर वापिस नही आते.. उसी आदि नारायण परमेश्वर की मै शरण हु.. केवल उसी परमेश्वर की पूजा करनी चाहिए..
***** तत्वदर्शी बाखबर संत अरबो मे एक*********
========( फोटो-10)p1 को देखे=========
गीता मे लिखा है वह बाखर तत्वदर्शी संत का मिलना बहुत कठिन है संतो ने कहा है वह तत्वदर्शी संत करोडो मे नही बल्कि अरबो मे कोई एक मिलेगा..
सदगूरू रामपाल जी महाराज के ज्ञान से जो भी कोई परिचत हो जायेगा, उसकी जुबान पर एक ही नारा होता है.
धरती पर कही नही है ऐसा ज्ञान.. गुरू नही है विश्व मे कोई संत रामपाल के समान..
घीसासंत- साघु की फौजा फिरे, साधु ना पाया एक..
लाखो मे तो है नही, करोडो मध्य देख...
Ghisa Sant ji keh rahe h Sadhu sando ki fojh Ghum rahi h. Lekin inme ek bhi Sadhu nhi h.. kyoki in Sadhu santo ke pass Supriem God (पूर्ण ब्रह्म) ki complete worship or TatavGyan nhi h.. ye sab kaal ke lok m hi mar kar kutte gadhe bante rahege.. in pass kaal tak ki worship vidi h.. पूर्ण मोक्ष नही है इनके पास.. पूर्णब्रह्म पूर्ण मोक्ष की पूजा विधि और तत्वज्ञान बताने वाला संत तो लाखो मे नही करोडो मे कोई एक मिलेगा... आज के समय मे वो संत रामपाल जी महाराज है.. लोग पत्थर भी उसी पेड पर मारते है जिस पर फल लगते है...
गरीबदास - कोटियो मध्य है नही रे झूमकरा..
अरबो मे कोई गरक, सुनो भई झूमकरा...
Garibdas g maharaj ke Shisye ne kaha ye Gyan or ye Bhagwan humne aaj tak nhi suna..
to Garibdas g vani ke madhyam se batate h.. ye TatavGyan batane wala Sant karodo m nhi milega tujhe.. Aarbo m koi Ek Sant hoga jo ye Supriem God(पूर्ण ब्रह्म) ki real worship vidi batayega.. jisse Puran moksh hoga..
To Aaj ke time World m only Sant Rampal g Maharaj hi Wo Sant h.. jinke Pass Supriem God ki complete worship vidi h..
गीता मे लिखा है -7 के श्लोक19 मे
बहुनाम् जन्मनाम् अन्ते ज्ञानवान माम् प्रपधते,
वासुदेव: सर्वम् इति स महात्मा सुदुर्लभ:...
गीता ज्ञान दाता अर्जुन को कह रहा है....
बहुनाम् - बहुत बहुत
जन्मनाम् - जन्मो के
अन्ते - अन्त मे
ज्ञानवान - कोई ज्ञानी आत्मा
माम् - मुझे
प्रपधते - भजता है लेकिन
वासुदेव - सर्व व्यापक परमात्मा (SupriemGod) जिसका सबके उपर वास हो वासुदेव कहलाता है
सर्वम इति - वो ही सब कुछ ह़ै
स महात्मा - ये बताने वाला वह संत महात्मा
सुदुर्लभ - बडी मुश्किल से मिलेगा....
भवार्भ - मतलब दुनिया मे अधिकतर लोग भूत पितरो की पूजा करते है तीर्थो की यात्रा करके ही अपने आप को मुक्त मानते है. कुछ सन्यासी तपस्वी बैरागी योगी ये पंडित सभी ब्रहमा विषणु शिव तक की भक्ती करते है और लोगो से करवाते है.. लेकिन जो दुर्गा का पति ब्रहाा विषणु शिव का पिता है निरंजन काल वेद गीता मे जिसको ब्रह्म कहा है वो कह रहा है गीता मे अर्जुन को - हजारो मे कोई एक बहुत बहुत जन्मो के अन्त मे मेरी यानी ब्रह्म की पूजा करता है शास्त्रो को आधार मानकर ,वरना सब ब्रह्मा बिषणु शिव या नीचे के देवी देवता भूत पितरो की पूजा मे उलझे रहते है...
लेकिन वासुदेव Supriem God जो सारी दुनिया को रचने वाला है जो ब्रह्मा विषणु शिव के पिता का भी पिता है ब्रहा का भी ब्रहा है मतलब पूर्ण ब्रह्म है उसकी Complete जानकारी रखने वाला, Complete पूजा विधि बताने वाला, पूर्ण मोक्ष दिलाने वाला संत महात्मा तो बडी मुश्किल से मिलेगा...
कबीर - सिध्द तारे पिंड अपना, साघु तारे खण्ड
उसको सदगुरू जानियो, जो तार देवे ब्रह्माण्ड...
वो सतगूरू अरबो मे कोई एक मिलेगा और वो सतगुरू रामपाल जी महाराज है..
भगत समाज से हाथ जोडकर प्रार्थना है वो संत इस धरती पर आये हुए है अपने तत्वज्ञान रूपी शास्त्रो से ज्ञान को जगाने और अज्ञान रूपी अन्धेरे को मिटाने आये है वो संत रामपाल जी महाराज है.. जो लोग अज्ञान को बेच कर रोजी रोटी कमा रहे है जिन्होने अज्ञान को धंधा बनाकर रखा है. उन लोगो ने भष्ट जजो नेताओ से मिलकर मिडिया को खरीद लिया है एक साजीश के तहत रामपाल जी महाराज को झूठे आरोप लगाकर जेल मे डाल दिया है.
ये समाज के दुश्मन स्वार्थी लोग नही चाहते ये सच्चाई समाज के लोगो को पता चले.. क्योकि इन लोगो को अज्ञान का धन्धा बंद जायेगा.. इनको मानव जीवन से कोई लेना देना नही है ये हमारा इतना किमती मानव जीवन बरबाद कर रहे है.
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