कबीर पर्मात्मा ने ब्रह्म को पाँच वेद दिये थे ।
पाँचवा वेद "स्वसम वेद" था ।
उसमे पूर्ण मुक्ती का मन्त्र लिखा था, लेकिन ब्रह्म ने चार तो इस सन्सार को दे दिये और पाँचवा वेद छुपा दिया । इस पांचवे वेद को कबीर साहेब जी ने अपनी "कबीर सागर" की वाणी मे लिखा है । लेकिन काल ने कहा था कि मै भी अपने दूत भेजूंगा , कलयुग मे आपके आने से पहले और सच सामने नही आने दूंगा !
बाकि रही बात वेद की तो वेद मे सारा कुछ कबीर साहेब के परमात्मिक गुणों के बारे मे ही बताया गया है! जैसे:-->
१. पर्मात्मा बिना माँ के गर्भ के इस मृत्युलोक मे आता है ।
२. वो कन्वारी बछीया का दुध पीता है ।
३. वो तीन मन्त्र देता है और तीन वक्त की पूजा बताता है ।
४. वो बन्दी छोड कह लाता है.
५. वो "कवि" नाम से प्रसिद्ध होता है.
६. वो ही कविर देव होता है
७. वेद मे ब्रह्म(क्षर पुरुष) को २१ ब्रह्मांडो का मालिक और परब्रह्म (अक्षर पुरुष) को ७ शंख ब्रह्माण्डों मलिक बताया है.
८. कबीर पर्मात्मा ने ही असंख्य ब्रह्मांडो को रचा ।
९. वो पहले से चल रही गलत भक्ती की जगह सही भक्ती करवाता है.
१०.सबकी भक्ती को खोल कर समझता है कि किसकी भक्ती वेदानुकूल है और पूर्ण मोक्षदायक है ।
११.वेदो मे लिखा है की कबीर साहेब अपने असली शरीर के ऊपर एक ओवर कोट (हल्का तेज- पुन्ज का शरीर) डाल कर आते है ।
१२.जिस तत्वदर्शी सन्त की तरफ गीता (वेद का सार) इशारा करती है कि "जो सन्त पूर्ण SHRISTI-RACHNA सुनायेगा वो ही तत्वदर्शी सन्त होगा" इसको भी खुद कबीर साहेब जी ने ही खोला था. बाकी सभी ने नकल की परमात्मा की वाणी से ।
ब्रह्म के दिन-रात (आयु) भी सिर्फ़ पर्मात्मा ही बता सकते है, क्योकि वो पिता है ब्रह्म के । वेदो मे ब्रह्म भगवान अपनी भक्ती "ओम" नाम से बताता है, जिस को कबीर साहेब भी अपनी वाणी मे देते थे । जो यहा से सत्लोक जाना चाहे वो ॐ नाम की कमाई काल/ब्रह्म को दे दे ।
क्रमशः .......
सत साहेब जी
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