माया माया सब कहे,
माया लखे ना कोय !
जो मन से ना उतरे,
माया कहिये सोय !!
अनुवाद : आदरणीय पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब ने माया के बारे में बताया है जो इन्सान को चारो तरफ से घेर कर रखा है, साहेब कहते है की माया माया तो सभी कहते है ये लेकिन उसके बारे में जानता कोई नही है ! इन्सान के मन में जो बात जो चीज़ चढ़ जाती है वो जो मन से बाहर नही आने देती वो ही माया है जैसे मैंने एक कीमती गाडी खरीदनी है अब 24 घंटे उस गाडी के बारे में ही सोचता रहू वो गाडी मन से नही उतर रही है वो माया ही है !!
सतगुरु देव की जय
पूर्ण ब्रह्म की जय
Posted via Blogaway
No comments:
Post a Comment