जगत गुरु रामपाल जीके अमृत शब्दोँ मेँ"कथा भक्त धन्ना दास"धन्ना भक्त जी एक गरीब किसान थेँ । धन्ना जी के खेत राजस्थानी क्षेत्र मेँ थे जहां वर्षा बहुत कम हुआ करती थी ।एक बार वर्षा हुई धन्ना जी ने खेत सवार बिजाई के लिऐ तैयार किया ।घर पर आये तो उन्को ज्वार का बीज दिया और कहाये पाँच सेर बीज ही है हमारे पास ।जी बीज बोकर आईयो कही बाँट दो किसी को ।नहीँ तो बालक भुखे मर जावेँगे ।जी बीज बिजाई करके आईयो जी ।धन्ना जी की पत्नी ने क्योकि ऐसा इस लिऐ बोली उसे पता था कि धन्ना जी बहुत ही दयालु है कोई बीज माँग लेगा तो उसे दे देवेगेँ ।धन्ना जी ज्वार का बीज लिये जा रहे थेखेत की और तो रास्ते मेँ (पुर्ण परमात्मा कबीर जी ) एक साधु रुप मेँ रास्ते पर चले आ रहे थे उन्के साथ उन्के कुछ शिष्य भी थे ।धन्ना जी साधुओँ को देखकर बोले राम-राम जी महात्मा जी आई पेड़ के नीचे थोड़ी देर आराम कर ली जीये और मुझे भी अपना दास समझ कर परमात्मा का ज्ञान सुनायेँ आप जी ।(साधु रुप मे परमात्मा )बोले भाई हम से तो बोला भी नहीँ जाता तीन दिन के भूखे है भाई ।ये सून धन्ना जी की आँखो मेँ आसू आ गये और झट से ज्वार का बीज साधुओँ के सामने रख कय बोले जी दास के पास तो ये बीज है आप इसे खा लिजिये ।तभी सबने थोड़ा-थोड़ा करके सारा बीज खा लियाफिर (साधु रुप परमात्मा) ने धन्ना जी को सारा ज्ञान समझाया ज्ञान समझ कर नाम दीक्षा ली ।(साधु रुप परमात्मा) धन्ना जी को नाम दीक्षा देँ कर बोले मर्यादा मेँ रहकर भक्तिँ करना और चलेँ गये।धन्ना जी ने गुरु जी द्वारा बताये हुऐ अनुसार परमात्मा का सुमिरन करता हुआ रास्ते से कंकर उठाये और खेँत मे चला गया ।और धन्ना जी सारे खेत मेँ कंकरोँ की बिजाई करके घर पर आ गये ।पत्नी ने पुछा : जी, बिजाई कर आये क्या धन्ना जी बोले हाँ बिजाई कर आया ।कुछ दिनो बाद किसी पड़ोसन ने बताया की तुमनेज्वार क्यो नहीँ बोई तुम्हारे सारे खेत मे तो तुम्बे ही लगे है । धन्ना जी की जी बीज बोकर आईयो कही बाँट दो किसी को ।नहीँ तो बालक भुखे मर जावेँगे ।जी बीज बिजाई करके आईयो जी ।धन्ना जी की पत्नी ने क्योकि ऐसा इस लिऐ बोली उसे पता था कि धन्ना जी बहुत ही दयालु है कोई बीज माँग लेगा तो उसे दे देवेगेँ ।धन्ना जी ज्वार का बीज लिये जा रहे थेखेत की और तो रास्ते मेँ (पुर्ण परमात्मा कबीर जी ) एक साधु रुप मेँ रास्ते पर चले आ रहे थे उन्के साथ उन्के कुछ शिष्य भी थे ।धन्ना जी साधुओँ को देखकर बोले राम-राम जी महात्मा जी आई पेड़ के नीचे थोड़ी देर आराम कर ली जीये और मुझे भी अपना दास समझ कर परमात्मा का ज्ञान सुनायेँ आप जी ।(साधु रुप मे परमात्मा )बोले भाई हम से तो बोला भी नहीँ जाता तीन दिन के भूखे है भाई ।ये सून धन्ना जी की आँखो मेँ आसू आ गये और झट से ज्वार का बीज साधुओँ के सामने रख कय बोले जी दास के पास तो ये बीज है आप इसे खा लिजिये ।तभी सबने थोड़ा-थोड़ा करके सारा बीज खा लियाफिर (साधु रुप परमात्मा) ने धन्ना जी को सारा ज्ञान समझाया ज्ञान समझ कर नाम दीक्षा ली ।(साधु रुप परमात्मा) धन्ना जी को नाम दीक्षा देँ कर बोले मर्यादा मेँ रहकर भक्तिँ करना और चलेँ गये।धन्ना जी ने गुरु जी द्वारा बताये हुऐ अनुसार परमात्मा का सुमिरन करता हुआ रास्ते से कंकर उठाये और खेँत मे चला गया ।और धन्ना जी सारे खेत मेँ कंकरोँ की बिजाई करके घर पर आ गये ।पत्नी ने पुछा : जी, बिजाई कर आये क्या धन्ना जी बोले हाँ बिजाई कर आया ।कुछ दिनो बाद किसी पड़ोसन ने बताया की तुमनेज्वार क्यो नहीँ बोई तुम्हारे सारे खेत मे तो तुम्बे ही तुम्बे लगे है ।धन्ना जी की पत्नी अगले दिन खेँत मेँ गयी जा कर देखा की सारे खेत मे तुम्बेँ ही लगे ज्वार का तो एक पौधा नहीँ हैँ ।बहुत गुस्सा हुई और एक बड़ा सा तुम्बा लिया और घर पर आ गयी । धन्ना जी लोटे हुऐ थे उन्के सिर पर तुम्बा मारना चाहा तो उनहोने बचाव किया तूम्बा जमीन पर गिर कर टुँट गया और उसमेँ से ज्वार ही ज्वार निकली देखकर हैरान हो गई ।धन्ना जी से बोली तूम्बेँ सेँ ज्वाय कैसे निकली ।धन्ना जी बोले परमात्मा जाने मेने तो कंकर बोये थे ।धन्ना जी की पत्नी ने एक बड़ा सारा कपड़ा लिया और खेत मे जाकर कपड़ा बिछाया और लावे तुम्बा कपड़े पर रखे और फोड़े ज्वार का बड़ा सारा ढेर लगा दिया ।"" " ">सत साहिब<" " ">पुर्ण संत जगत गुरु रामपाल जीके अमृत शब्दोँ मेँ"कथा भक्त धन्ना दास"धन्ना भक्त जी एक गरीब किसान थेँ । धन्ना जी के खेत राजस्थानी क्षेत्र मेँ थे जहां वर्षा बहुत कम हुआ करती थी ।एक बार वर्षा हुई धन्ना जी ने खेत सवार बिजाई के लिऐ तैयार किया ।घर पर आये तो उन्को ज्वार का बीज दिया और कहाये पाँच सेर बीज ही है हमारे पास ।जी बीज बोकर आईयो कही बाँट दो किसी को ।नहीँ तो बालक भुखे मर जावेँगे ।जी बीज बिजाई करके आईयो जी ।धन्ना जी की पत्नी ने क्योकि ऐसा इस लिऐ बोली उसे पता था कि धन्ना जी बहुत ही दय
Posted via Blogaway
No comments:
Post a Comment